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होम शहर पेपरलेस निबंधन से रजिस्ट्री की रफ्तार धीमी, कातिबों ने जताई नाराजगी

पेपरलेस निबंधन से रजिस्ट्री की रफ्तार धीमी, कातिबों ने जताई नाराजगी

Category: शहर | Date: 20 Aug 2026 | 👁️ Views: 91

अवर निबंधन कार्यालय, शेरघाटी में तीन अगस्त से लागू की गई पेपरलेस निबंधन व्यवस्था का शुरुआती असर रजिस्ट्री के कामकाज पर दिखाई देने लगा है। नई व्यवस्था लागू होने के करीब 15 दिन बाद भी निबंधन की रफ्तार अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है। कार्यालय में प्रतिदिन लोग निबंधन कराने की जानकारी लेने पहुंच रहे हैं, लेकिन तकनीकी जानकारी के अभाव, नई प्रक्रिया को लेकर संशय और लोगों के बीच जागरूकता की कमी के कारण कामकाज प्रभावित हो रहा है। डीड राइटरों (कातिबों) ने भी नई व्यवस्था के विरोध में कार्य बहिष्कार कर अपनी नाराजगी जताई है। दास्तानविशों का कहना है कि पेपरलेस व्यवस्था में बिना हस्ताक्षर और फोटो के निबंधन की प्रक्रिया को लेकर आम लोगों में अभी पूरी तरह विश्वास नहीं बन पाया है। उनका दावा है कि पिछले एक पखवारे में सामान्य लोगों का एक भी निबंधन नहीं हुआ है। अब तक हुए दो निबंधन सरकारी प्रक्रिया से संबंधित बताए जा रहे हैं। इससे निबंधन कार्यालय में रजिस्ट्री का काम काफी धीमा हो गया है। *65 कातिबों के सामने रोजगार का संकट* शेरघाटी निबंधन कार्यालय में करीब 65 अनुज्ञप्तिधारी डीड राइटर कार्यरत हैं। दास्तानविश विनय कुमार सहित अन्य कातिबों का कहना है कि नई व्यवस्था में उनकी भूमिका लगभग समाप्त कर दी गई है। इससे उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि वे डिजिटल व्यवस्था के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे अनिवार्य किए जाने से उन लोगों को परेशानी होगी, जिन्हें ऑनलाइन प्रक्रिया की जानकारी नहीं है। डीड राइटर संघ के अध्यक्ष उपेंद्र प्रसाद और वरिष्ठ डीड राइटर गणपति यादव ने कहा कि पेपरलेस निबंधन को लेकर आम लोगों में अभी असमंजस है। कई लोग नई प्रक्रिया की जानकारी लेने कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन प्रक्रिया समझ में नहीं आने पर वापस लौट जाते हैं। इससे निबंधन का काम प्रभावित हो रहा है। *बैंक लोन को लेकर भी संशय* डीड राइटर बलेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि पेपरलेस रजिस्ट्री के बाद मिलने वाले दस्तावेजों को लेकर बैंकों में भी संशय की स्थिति बनी हुई है। लोगों को आशंका है कि ऑनलाइन तैयार होने वाले दस्तावेज के आधार पर बैंक से ऋण लेने में किसी तरह की परेशानी न हो। हालांकि विभाग की ओर से व्यवस्था को पूरी तरह वैध और पारदर्शी बताया जा रहा है। कातिबों की मांग है कि डिजिटल निबंधन की सुविधा जारी रखी जाए, लेकिन इसे एकमात्र विकल्प नहीं बनाया जाए। जो लोग शिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम हैं, वे पेपरलेस प्रक्रिया के माध्यम से निबंधन कराएं। वहीं, तकनीकी जानकारी नहीं रखने वाले लोगों के लिए कातिबों के माध्यम से दस्तावेज तैयार कर निबंधन कराने की पुरानी सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए। *गुरुवार को अधिकारी और मीडिया के समक्ष रखा पक्ष* नई व्यवस्था से नाराज दास्तानविशों ने अपनी समस्याओं को लेकर गुरुवार को अधिकारी और मीडिया के समक्ष पक्ष रखा। उनका कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। दास्तानविशों के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने के बाद उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ा है और फिलहाल अधिकांश कातिब काम के अभाव में बैठे हैं। *अधिकारी ने कहा- कातिबों की नहीं जाएगी रोजी-रोटी* इधर, अवर निबंधन पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने पेपरलेस निबंधन को लेकर लोगों और कातिबों में फैले संशय को दूर करते हुए कहा कि नई व्यवस्था सरकार के निर्देश के अनुसार लागू की गई है। इसका उद्देश्य निबंधन प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और समय की बचत करने वाला बनाना है। उन्होंने कहा कि कातिबों के बेरोजगार होने की बात सही नहीं है। उन्हें सेवा प्रदाता के रूप में अधिकृत किया गया है और उनके लिए लाइसेंस भी उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने बताया कि कातिब पहले की तरह ही दस्तावेज का मजमून और डीड का विवरण तैयार कर पोर्टल पर उसकी एंट्री कर सकते हैं। यानी नई व्यवस्था में उनकी भूमिका पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। *जरूरत पड़ने पर हार्ड कॉपी भी मिलेगी* धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि पेपरलेस निबंधन का मतलब यह नहीं है कि पक्षकार को किसी भी स्थिति में कागज की प्रति नहीं मिलेगी। यदि कोई व्यक्ति निबंधन के बाद दस्तावेज की भौतिक प्रति यानी हार्ड कॉपी चाहता है तो उसे उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसलिए लोगों को इस संबंध में किसी प्रकार की आशंका रखने की जरूरत नहीं है। *'मे आई हेल्प यू' डेस्क से मिलेगी सहायता* अधिकारी ने बताया कि निबंधन कार्यालय में आम लोगों की सुविधा के लिए 'मे आई हेल्प यू' डेस्क स्थापित किया गया है। यहां कर्मियों द्वारा लोगों को पेपरलेस निबंधन की पूरी प्रक्रिया समझाई जा रही है। ऑनलाइन आवेदन, प्रविष्टि और अपॉइंटमेंट से लेकर कार्यालय में दस्तावेज प्रस्तुत करने तक की प्रक्रिया में लोगों की सहायता की जा रही है। उन्होंने बताया कि आम लोग ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी प्रविष्टि दर्ज कर सकते हैं और ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेकर निर्धारित तिथि पर कार्यालय पहुंचकर निबंधन करा सकते हैं। नई व्यवस्था में प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के साथ बिचौलियों की भूमिका को कम करने का भी प्रयास किया गया है। *जागरूकता बढ़ने के साथ रफ्तार पकड़ने की उम्मीद* अधिकारी के अनुसार, नई व्यवस्था अभी शुरुआती दौर में है। इसलिए लोगों में प्रक्रिया को लेकर कुछ भ्रम और संशय स्वाभाविक है। जैसे-जैसे लोगों को पेपरलेस निबंधन की प्रक्रिया की जानकारी मिलेगी, निबंधन की संख्या और रफ्तार दोनों बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने आम लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और कार्यालय में उपलब्ध सहायता केंद्र से जानकारी लेने की अपील की है। फिलहाल पेपरलेस निबंधन व्यवस्था को लेकर एक ओर विभाग इसे सरल और पारदर्शी व्यवस्था बता रहा है, वहीं दूसरी ओर कातिब रोजगार के संकट और आम लोगों में भ्रम का हवाला देकर पुरानी व्यवस्था को भी विकल्प के रूप में जारी रखने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई व्यवस्था लोगों के बीच कितना भरोसा कायम कर पाती है और शेरघाटी निबंधन कार्यालय में रजिस्ट्री की रफ्तार कब तक सामान्य हो पाती है।

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