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छात्राओं से शुल्क वसूली के विरोध में एबीवीपी का प्रदर्शन, प्राचार्य का पुतला फूंका

Category: गया | Date: 03 Sep 2026 | 👁️ Views: 80

एसएमएसजी कॉलेज, शेरघाटी में छात्राओं से कथित रूप से शुल्क वसूली और प्राचार्य की नियमित अनुपस्थिति को लेकर गुरुवार को विवाद गहरा गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं और छात्राओं ने कॉलेज के बाहर प्रदर्शन कर प्राचार्य दिनेश प्रसाद सिन्हा का पुतला फूंका। प्रदर्शनकारियों ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए छात्राओं से शुल्क वसूली पर तत्काल रोक लगाने तथा कॉलेज की व्यवस्था में सुधार की मांग की। एबीवीपी के पूर्व नगर मंत्री एवं छात्र नेता चंदन कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि कॉलेज के प्राचार्य नियमित रूप से कॉलेज में उपस्थित नहीं रहते हैं। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त के बाद प्राचार्य गुरुवार को कॉलेज पहुंचे। आरोप लगाया कि विद्यार्थी परिषद द्वारा पुतला दहन किए जाने की जानकारी मिलने के बाद ही वे कॉलेज पहुंचे। छात्रों ने कहा कि प्राचार्य की अनुपस्थिति के कारण विद्यार्थियों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पा रहा है। *छात्राओं से 2100 से 2600 रुपये लेने का आरोप* छात्र नेता रंजन कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय के कुलपति और डीएसडब्ल्यू की ओर से छात्राओं की फीस माफी को लेकर निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद छात्राओं से प्रत्येक सेमेस्टर कथित रूप से शुल्क लिया जा रहा है। आरोप लगाया कि शुल्क जमा किए बिना फार्म भरने या नामांकन की प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती है। सेमेस्टर पांच की छात्रा चुनमुन कुमारी और अंजली कुमारी ने बताया कि उनसे प्रत्येक सेमेस्टर करीब 2100 से 2600 रुपये तक शुल्क लिया जा रहा है। छात्राओं का कहना था कि आर्थिक परेशानी के बावजूद उन्हें मजबूरी में राशि जमा करनी पड़ रही है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले की जांच कराने की मांग की। *प्राचार्य ने आरोपों को किया खारिज* दूसरी ओर, प्राचार्य दिनेश प्रसाद सिन्हा ने छात्र संगठन द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि पुतला दहन कॉलेज परिसर में नहीं, बल्कि मुख्य गेट के बाहर किया गया और इसकी पूर्व सूचना कॉलेज प्रशासन को नहीं दी गई थी। ज्ञापन में शुल्क वसूली के संबंध में उठाए गए मामले पर उन्होंने कहा कि एक कर्मचारी द्वारा किसी मद में 50 रुपये लिए जाने की जानकारी मिली थी। इस पर संबंधित कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। प्राचार्य ने कहा कि सरकार के 2015 के निर्देश के अनुसार स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर एससी-एसटी वर्ग के विद्यार्थियों और छात्राओं से नामांकन शुल्क नहीं लिया जाना है। कॉलेज में नामांकित विद्यार्थियों में 70 प्रतिशत से अधिक छात्राएं और दलित वर्ग के विद्यार्थी हैं, जिनसे पार्ट-1 में कोई शुल्क नहीं लिया गया है। उनके अनुसार सामान्य श्रेणी के करीब 30 प्रतिशत विद्यार्थियों से ही नियमानुसार शुल्क लिया गया है। *कॉलेज के फंड संकट का भी दिया हवाला* प्राचार्य ने कहा कि शुल्क में छूट के कारण कॉलेज को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार या विश्वविद्यालय स्तर से डेफिसिट ग्रांट नहीं मिल रही है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की ओर से 15 दैनिक वेतनभोगी और आउटसोर्स सफाई कर्मी उपलब्ध कराए गए हैं, जिनके वेतन पर करीब दो लाख रुपये प्रतिमाह खर्च होता है। इसके अलावा बिजली बिल, नगर परिषद कर, साफ-सफाई और रखरखाव का खर्च भी कॉलेज को वहन करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से फंड की मांग करने पर कॉलेज को अपने स्तर से व्यवस्था करने की बात कही जाती है। ऐसे में कॉलेज संचालन के लिए आर्थिक संकट बना हुआ है। *नामांकन प्रक्रिया को लेकर भी आमने-सामने* प्राचार्य ने आरोप लगाया कि पहले कुछ लोग छात्र राजनीति की आड़ में नामांकन को प्रभावित करने का प्रयास करते थे। इस बार मेरिट लिस्ट के आधार पर ऑन-स्पॉट पारदर्शी तरीके से नामांकन कराया गया। उनके अनुसार इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और इसी कारण कुछ लोग कॉलेज प्रशासन का विरोध कर रहे हैं। प्राचार्य ने अपनी अनुपस्थिति के आरोप पर कहा कि विश्वविद्यालय की सीनेट बैठक या सरकारी स्तर की समीक्षा बैठक में शामिल होने के लिए ही उन्हें कॉलेज से बाहर जाना पड़ता है। अन्यथा वे कॉलेज में रहकर कार्य करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कॉलेज परिसर में पेयजल के लिए आरओ व अन्य वाटर सिस्टम लगाए गए हैं तथा विद्यार्थियों के लिए बिजली, पंखा, पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि छात्राओं से कथित शुल्क वसूली बंद नहीं हुई और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वहीं, प्राचार्य ने कहा कि कॉलेज में पारदर्शी व्यवस्था बनाए रखने के लिए वे प्रतिबद्ध हैं और किसी भी दबाव में नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा।
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